रविवार, 20 मार्च 2011

तेल संपदा पर कब्जा करने की अमेरिकी साज़िश

कराकस:वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने कहा है कि लीबिया पर की जा रही कार्यवाई उसकी तेल संपदा पर कब्जा करने की अमेरिकी सहित कुछ देशों की यह एक शुरुआत है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थन प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय सेनाओं के हस्तक्षेप की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा है कि वह इस कार्रवाई को लीबिया की तेल संपदा पर कब्जे के अमेरिकी प्रयास के रूप में देखते है।उन्होंने कहा कि यह बेहद खेदजनक है क्योंकि जहां युद्ध में अनेक मासूम लोगों की जानें जायेंगीं, वहीं कई और युद्ध दुनिया पर लद जायेंगे जिसमें हजारों-लाखों लोगों की जानें चली जायेंगीं. यह युद्धों का फोबिया है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को साम्राज्य के नाम से संबंधित करने वाले शावेज ने कहा कि साम्राज्य लोगों की जान की कितनी परवाह करता है? अफगानिस्तान और गाजा में हमलों को देखिए जिनमें हजारों लोग मारे गए। वह केवल लीबिया का तेल चाहते है। उन्होंने इस हस्तक्षेप को वैध बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की भी आलोचना की।
शावेज ने कहा कि यह दुखद है कि संयुक्त राष्ट्र ने स्वयं को युद्ध में शामिल किया और अपने मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि क्या लीबिया में गृहयुद्ध हो रहा है। हमनें देखा है कि विद्रोही तोपें चला रहे हैं और अब नाटो और अमेरिका की सेनाएं उनका समर्थन कर रही है। यह एक देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है।                                            उधर अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना ने लीबिया के रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं और बमबारी की। हमले से बौखलाए लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी ने बदला लेने की धमकी दी है।
अमेरिकी सेना का कहना है कि अमेरिका और ब्रिटेन के युद्धपोतों तथा पनडुब्बियों से लीबिया के 20 से अधिक तटीय ठिकानों पर 112 टोमाहॉक मिसाइलें दागी गईं। फ्रास के विमानों ने भी विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी लीबिया में कई स्थानों पर बमबारी की।
गठबंधन सेना की इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन ओडिसी डॉन' नाम दिया गया है। अलजजीरा के मुताबिक हवाई हमले में लीबिया के कई टैंक और सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लीबिया को उड़ान निषिद्ध क्षेत्र (नो फ़्लाई ज़ोन) घोषित करने के मसौदे पर मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं.
कर्नल गद्दाफ़ी के विरोधियों पर वायु हमलों को रोकने के लिए ये मसौदा पेश किया गया था.
ब्रिटेन और फ्रांस ने गुरुवार इस पर मतदान के जोर दे रहे थे जबकि रूस और चीन किसी भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं हैं.
ब्रिटेन और फ्रांस का कहना है कि अरब लीग ने इस तरह के उपायों का आग्रह किया था जिसके बाद उन्होंने यह प्रस्ताव पेश किया है.
बीबीसी समाचार के अनुसार अमरीकी की संयुक्त राष्ट्र में राजदूत सूसन राइस का कहना था कि सुरक्षा परिषद को उड़ान निषिद्ध क्षेत्र से कहीं आगे की कार्रवाई पर विचार करना चाहिए.
हालांकि अमरीका ने लीबिया पर आर्थिक पाबंदियों को और कड़ा करते हुए विदेश मंत्री मूसा कूसा और लीबिया की 16 सरकारी कंपनियों की परिसंपत्तियों को सील कर दिया है.
जबकि रूस और चीन ने लीबिया में संघर्ष विराम की अपील का समर्थन किया है. जर्मनी का कहना है कि अब भी लीबिया में कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है.

इस बीच लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है.
कर्नल गद्दाफ़ी के वफादार सैनिक ज़मीन और हवाई हमलों के ज़रिए अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब हो रहे हैं और पूर्व दिशा में आगे बढ़ते जा रहे हैं.
लड़ाकू विमानों ने अज़दबिया शहर के बाहर भयंकर बमबारी की है और अब कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों के लिए बेनगाज़ी को विद्रोहियों के कब्ज़े से छु़ड़ाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि बड़ी संख्या में लीबिया के नागरिक देश छोड़ रहे हैं और मिस्र में प्रवेश कर रहे हैं.
एजेंसी के अनुसार अब तक माना जा रहा था कि वही लोग लीबिया छोड़ रहे हैं जो काम की तलाश में अपने इलाक़े छोड़ते थे लेकिन अब आम लोग,औरतें और बच्चे भी इलाक़े छोड़ रहे हैं.
उधर पश्चिम में कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों को बहुत सफलता मिली है और वो ट्यूनीशिया की सीमा से लगी ज़ुवारा में दोबारा अपना नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे हैं.
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नचिकेता कपूर का सच/ चौथी दुनिया


चौथी दुनिया की तहकीकात से नचिकेता कपूर के बारे में चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं. चौथी दुनिया के पास वो सबूत हैं जिससे ये साबित होता है कि नचिकेता कपूर ने अपनी पढाई लिखाई का गलत ब्यौरा देकर एक मंत्रालय में उच्च पद हासिल किया. चौथी दुनिया के पास डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनेल एंड ट्रेनिंग यानी डीओपीटी का वो दस्तावेज हैं जिसमें लिखा है कि भविष्य में कभी किसी संवेदनशील प्रकृति के पद पर नियुक्ति के लिए इस व्यक्ति के नाम पर विचार न किया जाए.
दरअसल, युवा कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले नचिकेता कपूर बड़े लोगों से संबंध बनाने में शुरू से माहिर रहा है. ये htpp://samagravicharmunch.blogspot.comनचिकेता कपूर वो ही हैं जिसका नाम विकिलीक्स के खुलासे से चर्चा में आया है. इसपर आरोप है कि उसने 2008 में सरकार बचाने के लिए सांसदों को खरीदने की कोशिश की. 2005 में जब जे एन दीक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने, तब कपूर की एंट्री एनएससी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में रिसर्च अधिकारी के तौर पर हो गई. इसके बाद तो नचिकेता कपूर तरक्की की सीढ़ियां चढ़ता गया. ठीक एक साल बाद यानी मई 2006 में नचिकेता कपूर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में रेणुका चौधरी (मंत्री, स्वतंत्र प्रभार) का ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बन गया. बाकायदा इस संबंध में प्रशिक्षण एवं कार्मिक विभाग एवं मंत्रालय की ओर से नचिकेता कपूर को ओएसडी नियुक्त करने के लिए पत्र भी जारी किए गए. पुलिस वेरीफिकेशन तक हुआ. अंतत: कपूर ओएसडी बन भी गया. लेकिन ओएसडी बनने के लिए नचिकेता कपूर ने जो दस्तावेज पेश किए, वह असल में फर्जीवाड़े का एक अद्भुत उदाहरण थे. चौथी दुनिया के पास नचिकेता कपूर के शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़े दो अलग-अलग तरह के दस्तावेज हैं. एक में लिखा है कि उसने दिल्ली पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया है. जबकि ओएसडी बनने के समय उसने मंत्रालय में जो रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, उसमें प्रारंभिक शिक्षा तो दिल्ली पब्लिक स्कूल से ही, लेकिन स्नातक नेशनल ओपेन स्कूल से करने की बात दर्ज है. अब इसमें सही क्या है और गलत क्या, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकता है.
सितंबर 2008 में अचानक डीओपीटी की ओर से एक पत्र महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजकर यह सूचित किया जाता है कि कैबिनेट की अप्वायंटमेंट कमेटी ने मंत्रालय में निदेशक स्तर एवं वेतनमान के लिए नचिकेता कपूर की नियुक्ति को सहमति नहीं दी है और यह आदेश 6 अगस्त, 2007 से लागू किया जा रहा है. इस पत्र में यह भी स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि आगे से भविष्य में किसी भी संवेदनशील प्रकृति के पद पर नियुक्ति के लिए नचिकेता कपूर के नाम पर विचार न किया जाए. इसके बाद कपूर की मंत्रालय से भी विदाई हो गई. लेकिन दिलचस्प रूप से राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति ने कपूर को समिति में शामिल किया और उसे डीडीजी (प्रोटोकॉल) का पद दे दिया. जाहिर है, आयोजन समिति ने यह निर्णय लेते वक्त डीओपीटी के उक्त पत्र में दिए गए निर्देश पर ध्यान नहीं दिया.
बहरहाल, ये सारे मामले कुछ सवाल खड़े करते हैं. मसलन, पीएमओ के तहत आने वाली एनएससी में नचिकेता कपूर जैसे व्यक्ति की नियुक्ति किसने और कैसे की? ओएसडी पद से कपूर को हटाया तो गया, लेकिन डीओपीटी ने यह क्यों नहीं बताया कि आखिर किन वजहों के आधार पर कपूर को हटाया गया? और कपूर के पास ऐसी क्या योग्यताएं थीं कि राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति को उसे अपने यहां नियुक्त करना पड़ा? जाहिर है, पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके.
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होली मुबारक

मैंने माना कि बहुत रंग भरी होली है,             
हुस्न के रंग हैंमस्ती हैठिठोली है/            
उंगलियाँ काँप सी जाती हैं मैं छूता हूँ अबीर,
मेरे एहसास को डस्ता है जो छूता है समीर/
ये भी देखो कि सुनामी ने कहर ढाया है/ खून से जेह्न को तेज़ाब से भर लाया है/       
आओ! जिंदा हैं जो तूफां के थपेड़े सहकर,
उनके सदमों के घरौंदों को मुनव्वर करदें/                                            मकसदे-ज़ीस्त को एक और ही मआनी दे दें.
ये सुनामी तो क़यामत की कोई देवी है,      
जब भी आती है, दबे पांव चली आती है/
लोग जब नींद की आगोश में सोते हैं कहीं,  
चांदनी रात में ये सबको निगल जाती है./  
ऐ मेरे दोस्त मेरे दिल में बड़ी हलचल है,    
जब भी ख्वाबों के घरौंदों को नज़र लगती है,           
जब ज़मीं उठके समंदर को सज़ा देती है,     
चाँद झुकता है समंदर को मनाने के लिये,   
फिर भी लहरें किसी नौखेज़ सी बन जाती हैं /         
फिर जो आती है क़यामत की तबाही ऐ दिल,           
कांच की तरह सभी रंग बिखर जाते हैं,       
आग और खून में अरमान पिघल जाते है.
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