रविवार, 17 अप्रैल 2011

समय के साथ चलती हुई कहानियां/संडे नवभारत टाइम्स, अप्रैल १७, 2011

कहानी की दुनिया में रंजन जैदी एक जाना-माना नाम है.२५ कहानियों के इस संग्रह में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विसंगतियों को बड़े सार्थक ढंग से पेश किया गया है.पात्रों की बोलचाल की भाषा  उनके माहौल के मुताबिक ही रखी गयी है. कहानियों की भाषा सधी और कसी हुई है और ऐसी कोशिश दिखाई देती है कि शब्द बेकार न जाएँ. इसका पाठक पर अलग ही असर पड़ता है. सभी कहानियां किसी न किसी मकसद को लक्ष्य बनाकर लिखी गयी हैं. जैसे मकान, खारे पानी की मछलियाँ और नेमी बाबू अदि.कहानियां समय के साथ चलती हुई लगती है.                                             पुस्तक:रंजन जैदी की कहानियां,कथाकार:रंजन जैदी ,प्रकाशक:नटराज प्रकाशन, नई दिल्ली पृष्ठ:232 मूल्य:395.00 ISBN:978-81-89997-62-5  / इसी प्रकशन से (2010 में प्रकाशित) रंजन जैदी की अन्य पुस्तकें: अक्षर अक्षर सत्य (आलोचना), आधी आबादी का सच (वूमेन-पोईन्ट), मुस्लिम साहित्यकारों  का हिंदी में योगदान (सम्पादित), अरावली पब्लिकेशन, नई दिल्ली से प्रकाशित नया कहानी संग्रह  खारे पानी की मछलियाँ तथा अन्य कहानियां, पृष्ठ:164, मूल्य:225.00 ISBN:978-81-8150-108-0   --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. आइये! समग्र विचार मंच से जुड़कर इसका मर्म जानिए, अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. -प्रबंध संपादक