रविवार, 9 जनवरी 2011

ये शामे-गरीबां है/रंजन जैदी .

यज़ीद अपनी यज़ीदी पे फख्र करता रहा, झुका सका न यकीं को, झुके न बदरे-हुनैन / वो ज़ुल्म करता रहा और इमाम सहते रहे,  हर इक सदी की दुआ बन गए इमाम हुसैन / हुसैनियत की बक़ा को न फिर भी आंच आई, यज़ीद हार गया,ये थे ज़ुल्क़रनैन./ हुसैन क़त्ल  तो  होते  रहेंगे  बरसों-बरस,  हुसैनियत  कभी  पामाल  हो  नहीं  सकती / हरेक  ज़ुल्म  के  पीछे  छुपा  है  एक  यज़ीद, यज़ीदियत को कहीं भी जिला  नहीं  मिलती / छुआ  नमाज़  में  खाके-शिफ़ा  तो  इल्म  हुआ, खुदा  गवाह  कि कर्बोबला  पे  क्या  गुजरी/ ये शाम शामे-गरीबां है आओ मिल-बैठें / न जाने फिर कभी हम हों, न हों कि ये हिजरी / दुआ करो कि  हमेशा मुहब्बतें बरसें, मुहब्बतें हैं इबादत की कीमती गठरी / न कोई ज़ुल्म न ज़ालिम हमारे बीच रहे, ज़मीं पे अम्न  का रुतबा हो, खुश हो हर बशरी--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. 'समग्र विचार मंच' से जुड़कर अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. --नीना गर्ग  (प्रबंध संपादक)  .

पता नहीं वो अकेले में क्यों सुबुकती है/रंजन जैदी


अजीब है कि मुहब्बत पे नाज़ करती है,
पता नहीं वो अकेले में क्यों सुबुकती है.      
गुज़र गई शबे-फुरक़त लो सुब्ह होती है,      
मेरे पड़ोस में दुल्हन अभी भी रोती है.        
मैं बर्फ था तो पहाड़ों ने कर दिया पानी,       
मेरी ज़मीं तो ज़माने से बोझ सहती है.        
वफ़ा का दीप भड़कता है छाई तारीकी,         
बड़े सुकून से फिर भी वो साथ रहती है       
बहुत से लोग हैं कश्ती में जिनसे रिश्ता है,
मेरी निगाह मगर माँ तलाश करती है.         
मैं अपनी आँखें उसे दे तो दूं मगर डर है,    
वो बात-बात पे रोती है, रोती रहती है.  
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. 'समग्र विचार मंच' से जुड़कर अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. --नीना गर्ग  (प्रबंध संपादक)