मंगलवार, 1 मार्च 2011

खारे पानी की मछलियाँ तथा अन्य कहानियाँ/समीक्षा

लेखक:रंजन  जैदी
ये कहानियाँ आम आदमी का दर्द बयान करती हैं. हर कहानी को पढ़कर साफ़ हो जाता है कि कैसे सामाजिक आडम्बरों के कारण आम आदमी को पीछे धकिया दिया जाता है और वह  हाशिये पर चला जाता है. जैसे उसकी जिंदगी और उसके कहे का कोई मतलब ही न रह गया हो. आम आदमी की इस लड़ाई ने जाने-अनजाने इंसानी जिंदगी को तमाम तरह की विषमताओं  और विरोधों से भर दिया है. जैसे-जैसे आप इस किताब में शामिल कहानियों को पढेंगे, आपको उनका अक्स साफ़ नज़र आयेगा. बात साफ़ हो जाएगी कि इन कहानियों से आप का भी कुछ लेना-देना है, कुछ सरोकार है. कारण, आप भी एक आम आदमी हैं, जो इन कहानियों के आईने में अपनी तस्वीर भर देख रहा है. (किताब : खारे पानी की मछलियाँ तथा अन्य कहानियाँ, लेखक:रंजन  जैदी, प्रकाशक: अरावली बुक्स इंटरनेशनल, नयी दिल्ली, कीमत:225.00 रूपये, पेज:१६४) ISBN : 978-81-8150-108-0 aravaliprinters@rediffmail.com   
                                                                                                                                विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है.  समग्र विचार मंच से जुड़कर इसका मर्म जानिए, अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. -प्रबंध संपादक:नीना  गर्ग , उप- संपादक:इरम जैदी, संवाददाता:एम्.जे.जेड कम्मू

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