शनिवार, 30 अप्रैल 2011

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष

नई दिल्ली [दिल्ली संवाददाता]साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष पद के लिए  हिंदी के वरिष्ठ कवि-आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को चुन लिया गया है.। साहित्य अकादमी के इतिहास में इस पद पर हिंदी साहित्यकार के रूप में यह पहली नियुक्ति है. वर्ष 1954 में स्थापित साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर हमेशा अहिंदी भाषाओं के प्रतिनिधि ही चुने जाते रहे हैं। अकादमी के अध्यक्ष और बांग्ला के लब्ध-प्रतिष्ठ साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय ने तिवारी के चुने जाने की पुष्टि करते हुए प्रसन्नता जाहिर की है। पूर्व उपाध्यक्ष पंजाबी के साहित्यकार सुतिंदर सिंह नूर के निधन के बाद से अकादमी में यह पद खाली पड़ा था। इस पद के अन्य दावेदारों में कन्नड़ के नाटककार प्रसन्ना और मैथिली साहित्यकार विद्यानाथ झा विदित भी प्रत्याशी थे। इसके लिए गुवाहाटी में पड़े कुल 66 मतों में से 47 विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को मिले। जबकि प्रसन्ना को 15 और विदित को 4 वोट ही मिल सके । इस खबर को सुनकर श्री तिवारी ने कहा कि अब मैं केवल हिंदी का ही नहीं, बल्कि सभी 24 भाषाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। इसलिए अकादमी के संविधान और स्वायत्तता के चरित्र के अनुरूप हम सभी भाषाओं के विकास और संवर्धन का प्रयास करेंगे।
वरिष्ठ आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने तिवारी के निर्वाचन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बार हिंदी का कोई व्यक्ति अकादमी का उपाध्यक्ष बना है, इसका स्वागत किया जाना चाहिए। वरिष्ठ कवि, कथाकार, पत्रकार डॉ. रंजन जैदी ने कहा कि यह सभी 24 भाषाओं के लेखकों का स्नेह और विश्वास है जिसपर श्री तिवारी को खरे उतरना होगा. उन्होंने कहा कि वह एक कुशल संयोजक के रूप में पहले भी अपने  होने की गवाही दे चुके हैं, अब ज़िम्मेदारी बड़ी हो गयी है, निश्चय ही यह बेहद ख़ुशी की बात है.  हिंदी के कवि जनार्दन मिश्र ने कहा कि   मैं उन्हें बधाई दूंगा हालाँकि तिवारी का कार्यकाल मात्र वर्ष 2012 तक होगा लेकिन कुछ बड़ा कर जाने के लिए कुछ क्षण ही काफी होते हैं.
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति के लिए  निर्वाचन प्रणाली का प्रयोग किया जाता है जिसमें मतदान अकादमी की सामान्य परिषद के सदस्य करते हैं। ये सदस्य विभिन्न राज्यों की अकादमियों के अलावा साहित्य-संस्कृति से जुड़े राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि होते हैं। चुनाव केवल  पांच वर्षो के लिए होता है।
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