चौथी दुनिया की तहकीकात से नचिकेता कपूर के बारे में चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं. चौथी दुनिया के पास वो सबूत हैं जिससे ये साबित होता है कि नचिकेता कपूर ने अपनी पढाई लिखाई का गलत ब्यौरा देकर एक मंत्रालय में उच्च पद हासिल किया. चौथी दुनिया के पास डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनेल एंड ट्रेनिंग यानी डीओपीटी का वो दस्तावेज हैं जिसमें लिखा है कि भविष्य में कभी किसी संवेदनशील प्रकृति के पद पर नियुक्ति के लिए इस व्यक्ति के नाम पर विचार न किया जाए. दरअसल, युवा कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले नचिकेता कपूर बड़े लोगों से संबंध बनाने में शुरू से माहिर रहा है. ये htpp://samagravicharmunch.blogspot.comनचिकेता कपूर वो ही हैं जिसका नाम विकिलीक्स के खुलासे से चर्चा में आया है. इसपर आरोप है कि उसने 2008 में सरकार बचाने के लिए सांसदों को खरीदने की कोशिश की. 2005 में जब जे एन दीक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने, तब कपूर की एंट्री एनएससी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में रिसर्च अधिकारी के तौर पर हो गई. इसके बाद तो नचिकेता कपूर तरक्की की सीढ़ियां चढ़ता गया. ठीक एक साल बाद यानी मई 2006 में नचिकेता कपूर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में रेणुका चौधरी (मंत्री, स्वतंत्र प्रभार) का ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बन गया. बाकायदा इस संबंध में प्रशिक्षण एवं कार्मिक विभाग एवं मंत्रालय की ओर से नचिकेता कपूर को ओएसडी नियुक्त करने के लिए पत्र भी जारी किए गए. पुलिस वेरीफिकेशन तक हुआ. अंतत: कपूर ओएसडी बन भी गया. लेकिन ओएसडी बनने के लिए नचिकेता कपूर ने जो दस्तावेज पेश किए, वह असल में फर्जीवाड़े का एक अद्भुत उदाहरण थे. चौथी दुनिया के पास नचिकेता कपूर के शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़े दो अलग-अलग तरह के दस्तावेज हैं. एक में लिखा है कि उसने दिल्ली पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया है. जबकि ओएसडी बनने के समय उसने मंत्रालय में जो रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, उसमें प्रारंभिक शिक्षा तो दिल्ली पब्लिक स्कूल से ही, लेकिन स्नातक नेशनल ओपेन स्कूल से करने की बात ![]() दर्ज है. अब इसमें सही क्या है और गलत क्या, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकता है.सितंबर 2008 में अचानक डीओपीटी की ओर से एक पत्र महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजकर यह सूचित किया जाता है कि कैबिनेट की अप्वायंटमेंट कमेटी ने मंत्रालय में निदेशक स्तर एवं वेतनमान के लिए नचिकेता कपूर की नियुक्ति को सहमति नहीं दी है और यह आदेश 6 अगस्त, 2007 से लागू किया जा रहा है. इस पत्र में यह भी स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि आगे से भविष्य में किसी भी संवेदनशील प्रकृति के पद पर नियुक्ति के लिए नचिकेता कपूर के नाम पर विचार न किया जाए. इसके बाद कपूर की मंत्रालय से भी विदाई हो गई. लेकिन दिलचस्प रूप से राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति ने कपूर को समिति में शामिल किया और उसे डीडीजी (प्रोटोकॉल) का पद दे दिया. जाहिर है, आयोजन समिति ने यह निर्णय लेते वक्त डीओपीटी के उक्त पत्र में दिए गए निर्देश पर ध्यान नहीं दिया. बहरहाल, ये सारे मामले कुछ सवाल खड़े करते हैं. मसलन, पीएमओ के तहत आने वाली एनएससी में नचिकेता कपूर जैसे व्यक्ति की नियुक्ति किसने और कैसे की? ओएसडी पद से कपूर को हटाया तो गया, लेकिन डीओपीटी ने यह क्यों नहीं बताया कि आखिर किन वजहों के आधार पर कपूर को हटाया गया? और कपूर के पास ऐसी क्या योग्यताएं थीं कि राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति को उसे अपने यहां नियुक्त करना पड़ा? जाहिर है, पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके. |
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