मीडिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन चुकी है. मीडिया आज चंद लोगों की वजह से शर्मिंदगी झेल रहा है. जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके बारे में भी स्पष्ट रूप से कुछ भी कहना मुश्किल है. सीधे-सीधे किसी को दलाल कह देना बहुत बड़ी गाली सी है. जो सत्ता के गलियारे में रह रहे हैं, वे जानते हैं कि पार्टियों में दलाली कौन करते रहे हैं, कुछ जिंदा हैं, कुछ मर गए. कुछ राजनीति में दिवालिये हो गए, कुछ दिवालिये होने के कगार पर है. आरोप-प्रत्यारोपों के सिलसिले कभी ख़त्म नहीं होंगे. भारतीय मीडिया का योगदान कम नहीं है. उसने समाज और देश के हर क्षेत्र में जागरूकता लाने की महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. RTI की भूमिका मीडिया ने ही बनायीं थी. आज पंचायत हो या मंरेगा जैसी योजनाओं का ग्राफ मीडिया ने ही तैयार किया था. उदाहरण बहुत से हैं. उदाहरण ज्वलंत भी हैं. मीडिया को शर्मिंदा मत करें. क्योंकि यह एक ऐसी लगाम है जिससे देश का विकास और प्रगति का आधार जुड़ा हुआ है. यदि मीडिया कमज़ोर पड़ गया तो देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी. हालाँकि मीडिया में ऐसे जुझारू और प्रतिभाशाली पत्रकार अभी भी पूरे दम-ख़म के साथ सक्रिय हैं और हर स्थिति पर निगाह रख रहे हुए हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में भी ऐसे पत्रकार आते रहेंगे जो देश की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं करेंगे. जो कुछ हुआ है, उसकी अभी जाँच चल रही है. जो होता है, उसके पीछे एक पूरी मशीनरी काम करती है. इसमें औद्योगिक घराने मिले होते हैं और राजनेता भी, जो संसद में औद्योगिक घरानों की सुरक्षा के विकल्प प्रस्तुत करते रहते हैं. दलाली यहाँ से शुरू होती है. ऐसे पोलिटिकल-दलालों के हाथ बहुत फैले होते हैं और उनके पास अकूत धन होता है जिनपर पुलिस और प्रशासन का शिकंजा नहीं कस पाता है. कारण यह है कि पुलिस और प्रशासन पर इतने राजनीतिक दबाव होते हैं कि वे चाह कर भी दलालों को बेनकाब नहीं कर पाते हैं. बाबा रामदेव विदेशी बैंकों में जमा धन लाने कि गुहार तो करते हैं, उन राजनीतिक दलालों के घरों में जो अकूत धन जमा है, उसे बाहर निकलवाने का आन्दोलन क्यों नहीं चलाते? यह अपने आप में एक बहुत बड़ी विडंबना है. खुद उनकी कथित साधू-संतों की बिरादरी के आश्रमों के नाम पर कितनी संपत्ति और कितना काला धन है, कभी उन्होंने सोचा, उनके विरुद्ध आवाज़ उठाई है? ज़रा सोचिये तो!--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. 'समग्र विचार मंच' से जुड़कर अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. --नीना गर्ग (प्रबंध संपादक)
priya neena ji
जवाब देंहटाएंapke vicharon se sahmat hun.kewal kuch longo ki galti par puri patrkaar biradari par sawal khada karne uchit nahi hai.
arvind kumar singh