शब्दों के बदलते प्रतिरूप आश्चर्यजनक तरीके से चौंकाते हैं। स्थाननामों की रचना में अक्सर वहाँ की भौगोलिक खूबियाँ महत्वपूर्ण होती हैं। पूर्वांचल के एक प्रांत का नाम मेघालय इसलिए है क्योंकि यहाँ अक्सर बादलों का डेरा रहता है। मेघ अर्थात बादल और आलय अर्थात घर। आलय यानी आश्रय। संस्कृत के लय का अर्थ है आराम करने की जगह जाहिर है दुनियाभर के आरामगाहों में घर को सबसे ऊँचा दर्ज़ा मिला हुआ है। इसी तर्ज़ पर हिमालय को देखें। हिम + आलय = हिमालय अर्थात वह स्थान जहाँ बर्फ़ का बसेरा हो। जहाँ हिम को आश्रय मिले वह है हिमालय। ठेठ पूर्वोत्तर का ही एक और प्रान्त है अरुणाचल प्रदेश। पूर्व दिशा सूर्योदय का प्रतीक है। अरुण का अर्थ होता है प्रातः की लालिमा, लाल रंग। अरुण सूर्य के सारथी का नाम भी है क्योंकि सूर्योदय से पहले उसकी लाल रश्मियों को थामने वाले अरुण के दर्शन होते हैं। यही नहीं, आप्टेकोश में सूर्य का एक पर्याय अरुण भी बताया गया है। संस्कृत में अचल का अर्थ होता है पर्वत। चल् धातु में गति का भाव है। निषेध या नकार की अर्थवत्त वाले अ उपसर्ग के लगने से अचल का अर्थ हुआ जो चलता न हो अर्थात जो स्थिर हो। इस तरह अचल में पर्वत या पहाड़ का भाव स्थिर होता है और अरुण + अचल = अरुणाचल का मतलब हुआ सूर्यपर्वत, सूर्योदय का प्रान्त अथवा वह स्थान जहाँ सबसे पहले सूर्य उगता है।
इसी कड़ी में आता है हिमाचल प्रदेश। अरुणाचल की तरह ही हिमाचल का अन्वय हुआ हिम + अचल = हिमाचल यानी वह प्रदेश जहाँ हमेशा बर्फ़ जमी रहती हो। यह आश्चर्य की बात है कि इस हिमप्रान्त की राजधानी शिमला के नाम के साथ बर्फ़ जैसा कोई शब्द चस्पा नहीं है। शिमला की व्युत्पत्ति श्यामला ( देवी ) से जोड़ी जाती है। श्यामला देवी दुर्गा का एक नाम-रूप है। भारत के ज्यादातर पर्वतीय शहरों की तरह ही शिमला का विकास भी अंग्रेजी राज में हुआ, मगर उनके आने से पहले भी यहाँ बस्ती हुआ करती थी जिसका नाम शिमला था। अठारहवीं सदी के दूसरे दशक में सतलुज घाटी के विस्तृत सर्वेक्षण कार्य के दौरान स्कॉटिश सर्वे दल ने पहाड़ियों से घिरे शिमला ग्राम को खोजा था। आमतौर पर शिमला का नाम श्यामलादेवी से जोड़ा जाता है जिनका प्राचीन मंदिर यहाँ है। 1822 में स्कॉटिश सिविल अफ़सर चार्ल्स केनेडी ने यहाँ अंग्रेज अधिकारियों के लिए पहली आरामगाह बनवाई थी।
संस्कृत के श्याम शब्द का अर्थ काला, धूसर, गहरा भूरा या नीला होता है। श्याम यानी बादल भी और श्याम यानी शिव भी। श्याम से ही बना है श्यामा अर्थात काली रात, काली नदी, काली गाय, तुलसी का पौधा, मादा कोयल आदि। हिन्दी का साँवला शब्द भी इसी कड़ी का है और श्यामल > शामल > साँवल > के क्रम में साँवला हुआ। इसका स्त्री रूप साँवली होता है। श्यामल का स्त्री रूप श्यामला बनेगा। दुर्गा पर्वतवासिनी हैं और इसीलिए इन्हें पहाड़ाँवाली कहा जाता है। पर्वतीय स्थानों पर दुर्गा के विभिन्न नामोंवाले धाम मिलते हैं जैसे कालका जो हरियाणा में है। कालका शिमला रेलमार्ग प्रसिद्ध है। कालका भी देवी दुर्गा का ही रूप है जो श्यामवर्णी है। इसी तरह कई जगह चण्डीदेवी के मंदिर होते हैं। चण्डिका रौद्ररूपधारिणी दुर्गा हैं जिनका वर्ण श्यामल है। इसी तरह दुर्गा का सबसे प्रसिद्ध रूप काली का है। इन्हें कालिका भी कहते हैं जिसका अपभ्रंश ही कालका है। स्पष्ट है कि श्यामला में काले वर्णवाली कालिका का भाव ही है। भाषा वैज्ञानिक व्युत्पत्ति के हिसाब से डॉ रामविलास शर्मा शिमला के शिम में हिम देखते हैं। उनका कहना है कि पूर्ववैदिक भाषाओं में हिम का रूप घिम था। स्लाव और केल्त भाषाओं के ध्वनिरूपों से तुलना करते हुए वे यह स्थापना देते हैं। लात्वियाई भाषा में हिम का एक रूप जीअँम है, लिथुआनी में यह झीअँम है। इसी तरह जब ज का अघोषीकरण हुआ तो पुरानी प्रशियाई में यह सॅमॉ हो जाता है। हिम का पूर्व रूप घिम है इसकी जानकारी इसके ग्रीक रूप खॅइम से होती है। सॅमॉ जैसे रूप से ही शिमला के शिम का विकास समझ में आता है। इसी तरह बर्फ़ के लिए कश्मीरी में शीन है जो हिमा का रूपान्तर ही है।--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. 'समग्र विचार मंच' से जुड़कर अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. --नीना गर्ग (प्रबंध संपादक)
इसी कड़ी में आता है हिमाचल प्रदेश। अरुणाचल की तरह ही हिमाचल का अन्वय हुआ हिम + अचल = हिमाचल यानी वह प्रदेश जहाँ हमेशा बर्फ़ जमी रहती हो। यह आश्चर्य की बात है कि इस हिमप्रान्त की राजधानी शिमला के नाम के साथ बर्फ़ जैसा कोई शब्द चस्पा नहीं है। शिमला की व्युत्पत्ति श्यामला ( देवी ) से जोड़ी जाती है। श्यामला देवी दुर्गा का एक नाम-रूप है। भारत के ज्यादातर पर्वतीय शहरों की तरह ही शिमला का विकास भी अंग्रेजी राज में हुआ, मगर उनके आने से पहले भी यहाँ बस्ती हुआ करती थी जिसका नाम शिमला था। अठारहवीं सदी के दूसरे दशक में सतलुज घाटी के विस्तृत सर्वेक्षण कार्य के दौरान स्कॉटिश सर्वे दल ने पहाड़ियों से घिरे शिमला ग्राम को खोजा था। आमतौर पर शिमला का नाम श्यामलादेवी से जोड़ा जाता है जिनका प्राचीन मंदिर यहाँ है। 1822 में स्कॉटिश सिविल अफ़सर चार्ल्स केनेडी ने यहाँ अंग्रेज अधिकारियों के लिए पहली आरामगाह बनवाई थी।
संस्कृत के श्याम शब्द का अर्थ काला, धूसर, गहरा भूरा या नीला होता है। श्याम यानी बादल भी और श्याम यानी शिव भी। श्याम से ही बना है श्यामा अर्थात काली रात, काली नदी, काली गाय, तुलसी का पौधा, मादा कोयल आदि। हिन्दी का साँवला शब्द भी इसी कड़ी का है और श्यामल > शामल > साँवल > के क्रम में साँवला हुआ। इसका स्त्री रूप साँवली होता है। श्यामल का स्त्री रूप श्यामला बनेगा। दुर्गा पर्वतवासिनी हैं और इसीलिए इन्हें पहाड़ाँवाली कहा जाता है। पर्वतीय स्थानों पर दुर्गा के विभिन्न नामोंवाले धाम मिलते हैं जैसे कालका जो हरियाणा में है। कालका शिमला रेलमार्ग प्रसिद्ध है। कालका भी देवी दुर्गा का ही रूप है जो श्यामवर्णी है। इसी तरह कई जगह चण्डीदेवी के मंदिर होते हैं। चण्डिका रौद्ररूपधारिणी दुर्गा हैं जिनका वर्ण श्यामल है। इसी तरह दुर्गा का सबसे प्रसिद्ध रूप काली का है। इन्हें कालिका भी कहते हैं जिसका अपभ्रंश ही कालका है। स्पष्ट है कि श्यामला में काले वर्णवाली कालिका का भाव ही है। भाषा वैज्ञानिक व्युत्पत्ति के हिसाब से डॉ रामविलास शर्मा शिमला के शिम में हिम देखते हैं। उनका कहना है कि पूर्ववैदिक भाषाओं में हिम का रूप घिम था। स्लाव और केल्त भाषाओं के ध्वनिरूपों से तुलना करते हुए वे यह स्थापना देते हैं। लात्वियाई भाषा में हिम का एक रूप जीअँम है, लिथुआनी में यह झीअँम है। इसी तरह जब ज का अघोषीकरण हुआ तो पुरानी प्रशियाई में यह सॅमॉ हो जाता है। हिम का पूर्व रूप घिम है इसकी जानकारी इसके ग्रीक रूप खॅइम से होती है। सॅमॉ जैसे रूप से ही शिमला के शिम का विकास समझ में आता है। इसी तरह बर्फ़ के लिए कश्मीरी में शीन है जो हिमा का रूपान्तर ही है।--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------विचार, व्यक्ति के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति होते हैं. इन्हीं से पहचान होती है. 'समग्र विचार मंच' से जुड़कर अपने विचारों को साझा कीजिये. सदस्य बनिए और अपने विचार-प्रधान-लेखों का ई-लेखन के माध्यम से पाठकों तक पहुँचने का प्रयास कीजिये. यह मंच आपका स्वागत करता है. --नीना गर्ग (प्रबंध संपादक)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Add comment------------------------
यदि आप samagravicharmunch.com को कोई सूचना या जानकारी देना चाहते हैं तो अपनी जानकारी neenag56@gmail.com पर भेजें. संपादक से आप neenag56@gmail.com के जरिये संपर्क कर सकते हैं.
कृपया कमेंट करने में मर्यादित भाषा का प्रयोग करे. लेख में छपे टिप्पणियों के प्रति samagravicharmunch के एडिटर / पब्लिशर की कोई वैधानिक ज़िम्मेदारी नहीं है.
samagravicharmunch की किसी रिपोर्ट से आपको शिकायत है तो आप अपनी शिकायत neenag56@gmail.com पर भेज सकते हैं. आपकी ईमेल या लिखित शिकायतों पर कार्रवाई की जायेगी.. आप हमसे 0-9350168223 के जरिये भी संपर्क कर सकते हैं.
Name (required)----------------
E-mail (required)--------------
Website------------------------
Title--------------------------
-----------------------------------------------------------
50000 symbols left
Notify me of follow-up comments
Send----------------------------