| ‘टूटे हुए दिलों की दुआ मेरे साथ है, दुनिया किधर भी रहे, ख़ुदा मेरे साथ है।’ |
भिलाई (छ.ग.): प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा इस्पातनगरी भिलाई में आयोजित प्रगतिशील शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एवं प्रगतिशील कवि केदारनाथ अग्रवाल जन्मशती समारोह के अन्तर्गत गत माह 14 मई को ख्यातिलब्ध शायरों ने अपनी शायरी से फैज़ अहमद फैज़ को याद किया और भारतीय गंगा-जमुनी तहजीब (संस्कृति) को और भी पुख़्ता करते हुए उर्दू और हिन्दी ज़ुबानों की एकरसता को साबित कर दिया. स्थानीय भिलाई निवास में सम्पन्न इस अन्तरराष्ट्रीय मुशायरे की अध्यक्षता पाकिस्तान की मशहूर शायरा डॉ. आरिफ़ा सैयदा ने की। इस मुशायेरे में विशिष्ट-अतिथि के रूप में लाहौर से फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की साहबज़ादी डॉ. मुनीज़ा हाश्मी ने भी शिरकत की. इस अवसर पर पाक-दूरदर्शन के निदेशक अब्दूर रऊफ़ एवं दुर्ग के महापौर डॉ. एस.के. तमेर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
अध्यक्षीय आसंदी से मुबारक़बाद देते हुये डॉ. आरिफ़ा सैयदा ने कहा कि उर्दू और हिंदी भाषाएँ, पाकिस्तानियों और हिन्दुस्तानियों की तरह मिलनसार हैं। यह हमारी सांस्कृतिक एकरूपता का बुनियादी और ठोस बयान है। उन्होंने फ़ैज़ साहब की रचनाओं का प्रभावी पाठ भी किया। संस्थान के निदेशक श्री जयप्रकाश मानस ने तरन्नुम में फ़ैज़ साहब की ग़ज़लों का पाठ कर महफ़िल को भाव-विभोर कर दिया।
देर रात तक चले मुशायरे में बनारस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रमुख डॉ. याक़ूब यावर, जनसत्ता (दिल्ली) के विख्यात स्तम्भकार फ़ज़ल इमाम मल्लिक के साथ स्थानीय तथा जाने-माने शायरों में फ़ैज़ सम्मान से सम्मानित बदरूल क़ुरैशी बद्र, अशोक शर्मा, मुकुन्द कौशल, नजीम कानपुरी, क़ाविश रायपुरी, डॉ. संजय दानी, साकेत रंजन प्रवीर, डॉ. नौशाद सिद्दीकी, रामबरन कोरी ‘क़शिश’, मोहतरमा नीता काम्बोज़ और निज़ामत कर रहे शायर मुमताज़ ने अपनी नायाब रचनायें पेश कीं।
इस अवसर पर केदार अग्रवाल की पौत्री श्रीमती सुनीता अग्रवाल, फ़िराक़ गोरखपुरी के नवासे एवं संस्थान के अध्यक्ष कवि विश्वरंजन, श्रीमती डॉ. तमेर, प्रमोद वर्मा की धर्मपत्नी डॉ. कल्याणी वर्मा अपनी सुपुत्री पाखी वर्मा के साथ विशेष रूप से उपस्थित थीं। इस अवसर पर डॉ. धनन्जय वर्मा डॉ. खगेन्द्र ठाकुर, डॉ. अजय तिवारी, डॉ. कृष्णदत्त पालीवाल, डॉ. सुधीर सक्सेना, माताचरण मिश्र, डॉ. श्याम सुंदर दुबे डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे डॉ. रोहिताश्व श्री भारत भारद्वाज, श्री नंद भारद्वाज, श्री श्रीप्रकाश मिश्र, डॉ. प्रताप राव कदम, श्री नरेन्द्र पुण्डरीक, श्री रमेश खत्री, डॉ. प्रकाश त्रिपाठी, अन्तरराष्ट्रीय पत्रकार श्रीमती संतोष श्रीवास्तव अदि भी उपस्थित थे. देर रात तक चले मुशायरे में बनारस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रमुख डॉ. याक़ूब यावर, जनसत्ता (दिल्ली) के विख्यात स्तम्भकार फ़ज़ल इमाम मल्लिक के साथ स्थानीय तथा जाने-माने शायरों में फ़ैज़ सम्मान से सम्मानित बदरूल क़ुरैशी बद्र, अशोक शर्मा, मुकुन्द कौशल, नजीम कानपुरी, क़ाविश रायपुरी, डॉ. संजय दानी, साकेत रंजन प्रवीर, डॉ. नौशाद सिद्दीकी, रामबरन कोरी ‘क़शिश’, मोहतरमा नीता काम्बोज़ और निज़ामत कर रहे शायर मुमताज़ ने अपनी नायाब रचनायें पेश कीं।
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के महासचिव व मशहूर शायर मुमताज़ (भिलाई) ने मुशायरे की निज़ामत (संचालन) कर समाँ बाँध दिया। संस्थान के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ कवि श्री अशोक सिंघई ने मुशायरे के अंत में आभार व्यक्त करते हुए किसी अनाम शायर का यह शेर पढ़कर वाहवाही लूटी कि - ‘टूटे हुए दिलों की दुआ मेरे साथ है, दुनिया किधर भी रहे, ख़ुदा मेरे साथ है।’
इस अवसर पर दुर्ग जिले के पुलिस अधीक्षक श्री आरिफ़ हसन, संस्थान के उपाध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष श्री सुरेन्द्र वर्मा, डॉ. गंगाप्रसाद बरसैया, श्री रविशंकर शुक्ल, श्री शिव कुमार द्विवेदी, श्री हरीश वाढेर, डॉ. सुधीर शर्मा, गुलबीर भाटिया, गिरीश पंकज, डॉ. चितरंजन कर, डॉ. तीर्थेश्वर सिंह, श्री रतनलाल सिन्हा, प्रशांत कानस्कर, राधेश्याम सिन्दुरिया, शिवमंगल सिंह, श्रीमती शान्तिलता वर्मा, श्रीमती प्रभा सरस, श्रीमती शकुन्तला शर्मा सहित इस्पातनगरी के साहित्यकार व साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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